
वर्ष 2018 में प्रधानाध्यापक पद पर प्रोन्नति के उपरांत मैंने अपना पदस्थापन हेतु प्रथम विकल्प प्रोन्नत मध्य विद्यालय खड़िहारा उर्दू (बालक) प्रखंड बाराहाट जिला बांका (बिहार) दिया। अल्पसंख्यक बाहुल्य होने एवम प्रशासनिक दृष्टिकोण से वहां की छवि अच्छी न होने के कारण वरीयता में ऊपर के शिक्षक इस विद्यालय को पसंद नहीं किया जिस कारण मेरा आसानी से इस विद्यालय में पदस्थापन हो गया। मेरे कई मित्र एवं शुभचिंतक के साथ साथ तत्कालीन जिला पदाधिकारी बांका एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी बांका ने मुझे इतना कठिन एवम बदलाव की चुनौतीपूर्ण स्थान चुनने का कारण जानना चाहा था। तब मैंने उनसे ही प्रेरित होने की बात कह कर इस गांव की नकारात्मक छवि को बदलने एवम उत्कृष्ट विद्यालय बनाने को चुनौती के रूप में लिया। विद्यालय के शिक्षकों, बच्चों एवं समुदाय के अपार सहयोग से छवि बदलते गई ।
लोगों ने ईमानदारी एवम पारदर्शिता के साथ कार्य को पसंद किया। मेरा मानना है कि विद्यालय समाज का दर्पण होता है। विद्यालय के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर आप समाज का भी आकलन कर सकते हैं। व्हाट्सएप ,फेस ग्रुप , यू ट्यूब , ट्विटर ,इंस्टाग्राम बनाकर विद्यालय की बेहतरीन गतिविधियां पोस्ट कर लोगों से विद्यालय को कनेक्ट किया। कोरोना काल में फेसबुक के माध्यम से ऑन लाइन शिक्षण ने समुदाय से जुड़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।चेतना सत्र एवं पठन-पाठन को सुदृढ़ करते हुए विद्यालय के प्रति बच्चों एवं समुदाय के मन में प्रेम जागने में हम सफल हुए। वे विद्यालय को अब अपना समझते हैं। कम संसाधन के बावजूद हम लोग बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। गरीबी एवं आर्थिक पिछड़ेपन के कारण 8% बच्चे प्रतिवर्ष शिक्षा की मुख्य धारा से धार्मिक शिक्षा की ओर उन्मुख हो जाते हैं ।
इसके कारणों की समीक्षा से मुझे ज्ञात हुआ की धार्मिक शिक्षा उनके लिए जीवन उपयोगी साबित हो रहा है । वे अपने परिवार को कम उम्र में ही आर्थिक सहायता प्रदान करने में सक्षम हो रहे हैं। परंतु मेरे लिए चिंता का विषय है। इस प्रकार के छीजन को रोकने के लिए हर संभव उपाय हम लोग कर रहे हैं। गरीबी से मुक्ति एवं बेहतर जीवन स्तर के लिए शिक्षा ही एकमात्र औजार है, लोग इसे समझने भी लगे हैं।अभिभावकों के साथ विचार विमर्श निरंतर किया जा रहा है । मुझे विश्वास है कि इस दिशा में जल्द हम लोग सफल होंगे। बच्चों शिक्षकों एवं समुदाय के सहयोग से हम उत्कृष्ट विद्यालय की श्रेणी में शामिल होने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।टीचर्स ऑफ़ बिहार के प्रोजेक्ट शिक्षक साथी अंतर्गत विद्यालय का निशुल्क वेबसाइट बनना मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। मैं विद्यालय के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म को तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए प्रोजेक्ट शिक्षक साथी ,बेहतर समन्वय एवं सहयोग के लिए जनप्रतिनिधियों एवं समुदाय के प्रति आभार प्रकट करता हूं । मुझे आशा है कि सभी हितधारकों खासकर छात्रों,शिक्षकों एवम समुदाय का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा।
शुभकामनाओं के साथ,
उमाकांत कुमार
प्रधानाध्यापक